Feeds:
Posts
Comments

अंधकार

फैला हर कण हर संसार,
लेकर कई विचार – आकार,
हर लेता हूँ दीप उपहार,
मैं, प्रचंड प्रखर अंधकार |

मनुष्य ह्रदय में ले अवतार,
छुपकर करता मैं प्रहार,
जग में मचता हाहाकार,
मैं, प्रचंड प्रखर अंधकार ।

मेरी माया अपरम्पार,
मेरे कई रूप, रंग, शृंगार,
आक्रोश, लोभ, घृणा हैं कई प्रकार,
मैं, प्रचंड प्रखर अंधकार ।

भरकर मैं रण हुंकार,
नष्ट करता हर संसार,
रोक सको तो रोक लो,
तुमको देता मैं ललकार,
मैं, प्रचंड प्रखर अंधकार ।
Advertisements

आज ही देखा ख्वाब , टूट गया ,

दिल का हिस्सा क्यूँ रूठ गया ,

रात को फलक का चाँद भी तनहा था ,

मैं भी क्यूँ तन्हाई में फ़िसल गया |

 

रोशन जिंदगी का उजाला बुझ गया , 

जिंदगी का हर सहारा छिटक गया ,

बहती रही किनारा छोड कर नदी ,

मैं भी क्यूँ बिनकिनारा बह गया |

 

दर्द हुआ सीने में , फिर भी सुनता गया ,

कुछ न कहा, सब कुछ सहता गया ,

उड़ चली कोयल अपना बसेरा छोड कर ,

मैं भी क्यूँ बसेरा छोड सिमट गया |

 

राही था , चलता गया ,

लोग मिले , मिलकर हँसता गया ,

खुशी का बाँध न जाने कब टूट गया ,

मैं भी क्यूँ आँसूं बन छुट गया …

छोड़ा था साथ कल  ही

आँसू दिए थे उपहार

फिर क्यूँ दिल की धडकन बन जाते हो

कहो आज क्यूँ याद आते हो …

मुड कर न देखा कभी

ग़मगीन यादें थी हज़ार

फिर क्यूँ साँसों में खुशबू बन जाते हो

कहो आज क्यूँ याद आते हो …

तनहा जी रहे थे यूँही

अकेला था मैं बाज़ार

फिर क्यूँ ख़ामोशी का गीत बन जाते हो

कहो आज क्यूँ याद आते हो …

बंजारा

बेपरवा,बेफिक्र आवारा हूँ

मैं एक बंजारा हूँ |

 

किताब का कोरा आगाज़ हूँ

कहानी का बिनलिखा राज़ हूँ ,

खुद की दास्ताँ भुला चुका पर ,

यादों की, सपनो की आवाज़ हूँ |

 

चलते पानी का ठिकाना हूँ,

चढ़ते सूरज का फसाना हूँ ,

खुद का भरोसा नहीं पर ,

बहती हवा का सहारा हूँ |

 

कुरान का एक सिपारा हूँ ,

रात अँधेरी एक सितारा हूँ ,

खुद कभी ठेहेरता नहीं ,

कवि की नदी का किनारा हूँ ,

मैं एक बंजारा हूँ …

रुकी साँसों में फसी ये जिंदगी मेरी,
       बढ़ी अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
बिनखुली  किताब सी ये जिंदगी मेरी,
       लिखी अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
पतझड़ के फूल सी ये जिंदगी मेरी,
       खिली अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
तन्हाई की रात सी ये जिंदगी मेरी,
       कटी अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
खामोसी की पुकार सी ये जिंदगी मेरी,
       बोली अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
बेमंजिल राह सी ये जिंदगी मेरी,
       मुड़ी अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
आसुओं की बसंत बाहर ये जिंदगी मेरी,
      गुज़री अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने |
 
कई रंग दिखाती ये जिंदगी मेरी,
       कभी गम के तो कभी खुशी के मंजर रखती सामने,
खुदा की दुआ सी ये जिंदगी मेरी,
       लगी अभी नहीं, पड़ी जिंदगी है सामने …

आज

जिंदगी हर मोड़ पर थी मुस्कुराई,
          सोचा नहीं मैं आज के ख़यालात नहीं थे |
 
राहों में यूँ तो मिले कई फूल,
          रुका नहीं मैं आज के जज़्बात नहीं थे |
 
आसमान पे उड़ती पतंग ने थे पुकारा,
           रुका नहीं मैं आज के रास्ते नहीं थे |
 
रौशनी भरी रात ने पुकारा मुझे,
            पहुंचा नहीं मैं आज के सहारे नहीं थे |
 
बहती हवा ने पूछा दर्द मेरा,
             बोला नहीं मैं आज के अलफ़ाज़ नहीं थे |
 
वैसे तो जिंदगी में कोई पास नहीं था,
            दिल के करीब कोई गुलाब नहीं था,
काँटे फिर भी चुभ गए हाथों मे,
            रोया नहीं मैं आज के आँसूं नहीं थे…

मैं यहाँ अपने विचारों को कविताओं की मालाओं में पिरो कर आप सब के समक्ष प्रस्तुत करूँगा और आशा करूँगा की आप मेरे अंतर्द्वंद को समझे और बेबाक टिप्पणियां प्रस्तुत करें |

धन्यवाद्
आपका कवि